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                                         नफ़रतों का गुबार 
 

दोस्तो , मेरे भाइयो और बहिनों, बैसे तो में ब्लॉग लिखता नही परंतु आज कुछ मन उदास था मन मे अशांति थी , मे तनाव ग्रस्त था तो मन में आया क्यूँ ना अपने मन की बात आज  ब्लॉग पर लिख दूँ  अगर पोस्ट अच्छी लगे तो लाइक और कमेंट जरूर करें और हो सके तो एक अच्छा इंसान बनने की कोशिस करें हालांकि में ना तो कोई धरम गुरु हूँ ना ही कोई प्रभावशाली व्यक्ति मे एक छोटे से गाँव का सीधा सा आम  व्यक्ति हूँ ..।

बचपन मे मेरी बहुत सपने थे और मेरे माता पिता की भी मुझ पर आकांछाएँ थी की मेरा बेटा बड़ा होकर ये बनेगा बो बनेगा जैसे हर माँ बाप की होती है परंतु आज तक मेरे सपने तो पूरे नही हो सके ना ही माता पिता के में सोच लेता हूँ की मेरी कमी रही होगी और मे ये सोच कर संतोष कर लेता हूँ की जो भी हो रहा है अच्छा है क्यूंकी भगवान, ईश्वर,अल्लाह  नाम बहुत हो सकते हैं पर खुदा  जो भी करता है अच्छा ही करता है हो सकता है मेरे भले के लिए ही हुआ हो ।

खैर ये बातें बीत चुकी हैं पुरानी हो चुकी हैं अब नए जमाने मे आ गए हैं । आज चारों तरफ नफ़रतों का गुबार भरा हुआ है और इस नफरती  गुबार ने इन्सानो की इंसानियत को ही खतम कर दिया है जिधर देखो नफ़रतें ही नफ़रतें लोगों मे नजर आ रही है लेकिन अब भी कुछ लोग इंसानियत के रास्ते पर चल रहे हैं माना की ये कलयुग है परंतु ऐसा कभी सपने में भी नही सोचा था की लोगों में आपस में नफ़रतें इतनी हो जाएंगी । 

हमारी विचारधारा अलग हो सकती है , हमारी बोलचाल अलग हो सकती है, हमारे धरम अलग हो सकते हैं ,हमारी सोच अलग हो सकती है परंतु सभी इंसान हैं, सभी का खून लाल है, इन सब से ऊपर पहले इंसानियत होना चाहिये । हमे एक दूसरे के सुख दुख मे शरीक होना चाइए एक दूसरे की मदद करनी चाइए , हमे आपस में मिलजुलकर प्यार मुहव्वत से रहना चाइए , तो सब कुछ कितना अच्छा होता शहरों मे तो कब का खतम हो चुका है थोड़ा बहुत गाँव मे नजर आता था लेकिन बो भी खत्म होता जा रहा है हमे गाँव पर नाज था लेकिन नफ़रतों का गुबार मुहव्वत से कहीं ज्यादा शक्तिशाली निकला उस गुबार मे मुहव्वत को  उड़ा ले गया । 

आज कल सोशल मीडिया भी नफ़रतों की दीबार बनकर खड़ा हुआ है सोचा था सोशल मीडिया बोलने की आजादी का मंच प्रदान करेगा जिससे लोग आजादी से अपनी बात रख सकेंगे परंतु सोशल मीडिया ही नफ़रतों का अड्डा बना हुआ है कोई भी असभ्य व्यक्ति किसी को भी गाली दे देता है और प्रतिकिर्या में भी उससे बड़ी गाली दी जाती है क्या है ये, इससे क्या फाय दा है , हमें एक दूसरे को गाली या असभ्य भाषा का प्रयोग कर कुछ छण के लिए शांति मिल सकती है संतुष्टि मिल सकती है परंतु हमेशा के लिए नहीं  आप की गलत भाषा मन ही मन आपको कचोटती रहेगी अगर आप में इंसानियत ज़िंदा है तो , इस तरह की भाषा ही  नफ़रतों का प्रथम श्रोत हैं , आप की छवि दूसरों के प्रति कैसी नजर आयगी कभी सोचा है आपने नहीं , आप समाज को भी असभ्य बनाने के भागीदार बनेंगे सामने होते तो शायद इस तरह असभ्य नही बोलते क्यूंकी इंसानियत सामने खड़ी होती हो सकता है आपका मन बदल जाता की उसे बुरा लगेगा लेकिन बोलने की आजादी ऐसी मिली हम अपनी मर्यादा इंसानियत की हदें पार करते हुवे हम समाज मे गंदगी फैलाने का काम करने लगे , बहुत अफसोस होता है मन ही मन हमारे देश के युवा को क्या हो गया है ॥

हमारा उद्देश लोगों की भलाई करना होना चाहिए , देश हित के लिए होना चाहिए गलत रास्ते पर चलने बाले को सही रास्ता दिखाना चाहिए एक दूसरे को सम्मान और प्रेम स्नेह देने बाला होना चाहिए परंतु अब ऐसा नही हो रहा है सब उल्टा हो रहा है हमारा समाज तोड़ दिया गया है ध्रमों मे बांटकर हमारा सबसे बड़ा धरम इंसानियत ही होना चाहिए तभी हम तरक्की कर सकते हैं और हमारा देश भी ।

देश प्रेम ऐसा होना चाहिए जो दिखावा ना हो सच हो नाम के आगे या पीछे भारत लिख कर देश प्रेमी  नही बन सकते  देश प्रेम दिल से होना चाहिए ।

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